Panchkoshi Parikrama
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प्रयाग कुम्भ में 550 साल बाद शुरू हुई पंचकोशी परिक्रमा, आतंकी अकबर ने करवा दिया था बंद

पंचकोशी परिक्रमा की परंपरा को मुग़ल आतंकी अकबर ने करवाया था बंद, 550 साल बाद योगी ने करवाया शुरू

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आतंकवादी अकबर उसके बाद अंग्रेज और उसके बाद सेक्युलर, हिन्दुओ की एक महान परंपरा को दुबारा शुरू करने में पुरे 550 सालों का वक्त लगा

पर आख़िरकार हिन्दू एकजुट हुए और एक हिन्दू संत योगी आदित्यनाथ को सत्ता मिली जिसके बाद प्रयाग के कुम्भ में पंचकोशी परिक्रमा की शुरुवात 550 साल बाद हुई

आतंकवादी अकबर ने प्रयागराज में पञ्च कोशी की जो कुम्भ में परंपरा होती थी उसे बंद करवा दिया था, पर योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुवात इस कुम्भ से करवा दी

कई वर्षों के बाद साधु-संतों और मेला प्रशासन की कोशिशों से पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत हुई। संगम नोज पर साधु संतों और मेला प्रशासन के अधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना के बाद पांचकोसी परिक्रमा शुरू की। इस परिक्रमा पर 550 साल पहले अकबर ने रोक लगा दी थी।

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परिक्रमा की शुरुआत से पहले संगम पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि, जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि और अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि के साथ ही दूसरे साधु-संतों और मेला प्रशासन के अधिकारियों ने संगम में पूजा अर्चना की।

संगम में पूजा अर्चना के बाद तीन दिवसीय परिक्रमा शुरू हुई, जिसमें वाहनों के काफिले के साथ साधु-संत और मेला प्रशासन के अधिकारी भी रवाना हुए।

प्रयागराज के पूर्व दिशा में दुर्वासा ऋषि का आश्रम है और पश्चिम में भारद्वाज ऋषि का आश्रम है। उत्तर में पांडेश्‍वर महादेव स्‍थापित हैं और दक्षिण में पाराशर ऋषि की कुटिया बनी हुई है।

पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि यदि प्रयागराज पहुंचकर इन चारों स्‍थानों के दर्शन कर लिए जाएं तो प्रयाग की परिक्रमा पूरी मानी जाती है और व्‍यक्ति के पूर्व जन्‍म के पाप धुल जाते हैं। प्रयागराज की पंचकोसी परिक्रमा में इन चारों तीर्थ स्‍थानों को शामिल किया जाता है।

यह धार्मिक परिक्रमा गंगा पूजन का आरंभ होने के बाद से ही होती रही है, लेकिन 550 साल पहले मुगल बादशाह अकबर ने इसे बंद करवा दिया था। इसके बाद से साधु-संत लगातार इस परिक्रमा को शुरू करने की मांग कर रहे थे। अब जाकर इसका शुभारंभ हुआ है। इसमें सभी 12 माधव मंदिरों को भी शामिल किया गया है।

तीन दिवसीय इस परिक्रमा के पहले दिन अक्षयवट और सरस्‍वती कुंड के बाद जलमार्ग द्वारा बनखंडी महादेव और मौजगिरी बाबा के दर्शन किए जाएंगे। मौजगिरी मंदिर भृगु ऋषि का स्‍थान माना जाता है।

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उसके बाद सूर्य टंकेश्‍वर महादेव के दर्शन करते हुए, चक्र माधव और गदा माधव होते हुए परिक्रमा सोमेश्‍वर महादेव के मंदिर पहुंचेगी। उसके बाद दुर्वासा ऋषि के आश्रम के दर्शन करने बाद शंख माधव मंदिर होते हुए पहला दिन पूरा होगा।

दूसरे दिन की परिक्रमा में कोतवाल हनुमान जी के दर्शन करने के बाद दत्तात्रेय मंदिर, चेतनपुरी के साथ ही उत्तर में स्थित पांडेश्‍वर महादेव होते हुए वासुकी मंदिर आदि के दर्शन करते हुए भजन कीर्तन के साथ पूरी होगी।

परिक्रमा के आखिरी दिन श्रद्धालुओं की टोली संगम से गंगाजल लेकर प्रयागराज स्थित भरद्वाज ऋषि के आश्रम में जाकर अभिषेक करेगी। इसी के साथ तीन दिवसीय परिक्रमा का समापन होगा।

प्रयाग कुंभ में इस बार कई बंद हो चुकी परंपराओं की शुरुआत हुई। अकबर के किले में कैद अक्षय वट और सरस्वती कूप जिनका धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रहा है उसे श्रद्धालुओं के लिए सुगम बना दिया गया। इस बार श्रद्धालु भगवान राम और कृष्ण से संबंधित अक्षय वट के दर्शन कर पा रहे हैं।

अब श्रद्धालु सरस्वती कूप के भी दर्शन का लाभ ले पा रहे हैं। पंचकोसी यात्रा का आरंभ अकबर के समय में बंद हो चुकी तीसरी बड़ी परंपरा का आरंभ माना जा रहा है। -स्‍वामी यतीन्द्रानन्द गिरि (वरिष्ठ महामंडलेश्वर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा)