Where are the Mobile Factories Rahul Gandhiराजनीती

2 महीने हो गए सत्ता में, राहुल गाँधी बताओ मोबाइल की फैक्ट्रीयों पर काम कितना शुरू हुआ ?

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राहुल गाँधी देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष है, कई राज्यों में अब उनकी सरकारें भी है, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में उनकी सत्ता आ चुकी है

इन राज्यों में घूमते हुए राहुल गाँधी जो की कांग्रेस के अनुसार एक जिम्मेदार और सच्चे नेता है, उन्होंने कई प्रकार के वादे किये थे जनता से, साफ़ वादा था की जब हम सत्ता में आएंगे तो ये ये काम करेंगे

लोन माफ़ी के वादे पर तो किसानो को कांग्रेस पार्टी सत्ता में आते ही धोखा देकर लिमिट का गेम खेलने लग गयी, और अब तो लोन माफ़ी के नाम पर हजारों करोड़ की लूट भी मचाई जा चुकी है

इसके अलावा 5 लीटर रुपए दूध भी मिलने वाला था, और एक वादा बड़ा ही जबरजस्त था, और वो वादा था चीन में अलग अलग शहरों के बने मोबाइल बेचने का

राहुल गाँधी ने डूंगरपुर, धोलपुर, भोपाल, चित्रकूट में इस तरह के वादे किये थे की – सरकार आएगी तो हम मोबाइल की फैक्ट्री लगायेंगे और चीन में उन मोबाइल को निर्यात करेंगे और चीन का युवा जब फ़ोन के पीछे देखेगा तो उसे दिखा मिलेगा – मेड इन भोपाल, मेड इन डूंगरपुर, मेड इन चित्रकूट, मेड इन धोलपुर

राहुल गाँधी के वादों को सुनकर शायद चीन भी हैरान होगा, पर राहुल गाँधी ने ये वादे तो किये थे और विडियो भी मौजूद है, कांग्रेस ने तो हमेशा राहुल गाँधी को एक सच्चा नेता बताया है

राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता मिल गयी, और अब 2 महीने का समय लगभग हो चूका है सत्ता मिले हुए, ऐसे में 5 रुपए लीटर दूध कब मिलेगा, क्यूंकि गरीबों के बच्चे दूध की कमी से कुपोषण के शिकार तो हो ही रहे है साथ ही राहुल गाँधी ये भी बताएं की मेड इन डूंगरपुर, मेड इन भोपाल, मेड इन चित्रकूट, मेड इन धोलपुर मोबाइल फैक्ट्रीयों का क्या हुआ

कितना काम हुआ इन मोबाइल फैक्ट्रीयों पर, ब्लू प्रिंट बना, कहाँ तक काम पहुंचा, 2 महीने में शुरुवात हुई, सर्वे हुआ, आखिर इन मीडिया इन अलग अलग शहरों के मोबाइल फैक्ट्रीयों पर काम कितना आगे पहुंचा है, क्यूंकि वहां चीनी युवा भी तो परेशान है, उसे भी मेड इन डूंगरपुर, मेड इन भोपाल मोबाइल इस्तेमाल करना ही होगा, जिसका वो इंतज़ार कर रहा है, इन फैक्ट्रीयों में भारत के युवाओं को रोजगार भी मिलने वाला था, ऐसे में ये एक गंभीर प्रशन है की इन मोबाइल फैक्ट्रीयों पर काम कहाँ तक पहुंचा है