Press "Enter" to skip to content

1955 में अमेरिका ने भारत को दिया था UNSC सीट का ऑफर, नेहरु ने कहा था – “नहीं पहले चीन”

हमे सपोर्ट करें, इसे शेयर करें
  • 8.5K
    Shares

दुसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ, और इसमें एक और बॉडी का गठन हुआ जिसे आप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् कहते है

इस बॉडी में अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस शामिल थे, इन सभी ने एशिया के भी एक देश को शामिल करने को लेकर भारत के पास सबसे पहले प्रस्ताव भेजा था

भारत और चीन 1947-48 में आजाद हुए थे, उसके बाद भारत पूरी तरह लोकतंत्र बना जबकि चीन कम्युनिस्ट राज्य वाला देश, चीन आज भी वही है, वहां लोकतंत्र नहीं है, लोग अपने नेता का चुनाव नहीं करते

जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में एशिया के एक देश पर चर्चा चल रही थी तब लोकतान्त्रिक देश अमेरिका ने भारत को वरीयता दी

अमेरिका के राष्ट्रपति ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु को एक प्रस्ताव दिया और कहा की आप संयुक्त राष्ट्र के मेम्बर है, पर हम चाहते है की भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भी मेम्बर बने

ये भी कहा गया की चूँकि चीन लोकत्रंत नहीं है ऐसे में एक लोकतंत्र वाला देश ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के लिए ठीक रहेगा जो की भारत था

उन दिनों जवाहर लाल नेहरु पर चीन परस्ती सवार थी, उन्होंने अमेरिका के इस ऑफर को तुरंत ठुकरा दिया और कहा की नहीं पहले चीन

केनेडी जो की अमेरिका का राष्ट्रपति था उसने भारत को परमाणु संपन्न देश बनने का भी ऑफर दिया था, अमेरिका के पास परमाणु हथियार थे, तब भी नेहरु ने कहा था – नहीं पहले चीन

अमेरिका चाहता था की भारत सुरक्षा परिषद् का मेम्बर बने, उसके सहयोगी भी ये चाहते थे, उस से उलट दुनिया भर में नेहरु ने चीन का प्रचार करवाया, और चीन को ज्यादा काबिल और बेहतर देश बताया, एशिया से एक देश को सुरक्षा परिषद् में लिया ही जाना था, भारत के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों ने फिर चीन को सुरक्षा परिषद् का मेम्बर बना दिया

अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस के बाद चीन पांचवा देश बन गया, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में ये 5 देश स्थाई यानि परमानेंट मेम्बर है और इनको वीटो पॉवर है, यानि संयुक्त राष्ट्र में किसी भी प्रस्ताव पर विशेष वोटिंग का अधिकार

भारत भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् का मेम्बर है पर भारत स्थाई मेम्बर नहीं है, भारत स्थाई मेम्बर बनने के लिए दशको से जूझ रहा है पर चीन भारत पर राजी नहीं होता, एक तरह से भारत कदाचित कभी स्थाई मेम्बर नहीं ही बन सकेगा, भारत को स्थाई मेम्बर बनने, वीटो पॉवर पाने का खुला ऑफर दिया गया था पर नेहरु ने ये चीन को सौंप दिया

और आज चीन उसी वीटो पॉवर का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ही आये दिन करता है जो की नेहरु के कारण ही चीन को प्राप्त हुआ था, आज जब चीन ने मसूद अजहर पर भारत के खिलाफ वीटो किया तो भारत के अन्दर कांग्रेस पार्टी सबसे ज्यादा खुश है और वो भारत के ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोस रही है

Comments are closed.