यकीन मानिए नहीं रोका गया शफीकुर रहमान जैसे उन्मादियों को तो निगल जायेंगे ये भारत को

भारत का चाहे कितना भी आर्थिक विकास हो जाये, पर भारत में जो स्तिथि बन रही है उस से भारत का विनाश लगभग तय ही समझिये, ये बात आपको भले ही कडवी लगे पर ये बात सच है

उदाहरण के तौर पर कश्मीर ही देखिये, अगर वहां से हमारी सेना को हटा लिया जाये तो कितने मिनट तक कश्मीर भारत का ही राज्य रह सकेगा ? और जिस तरह पुरे देश में मजहबी उन्मादियों की संख्या बढ़ रही है, उस से ये भी एक फैक्ट है की कुछ दशको में ये भारत में बहुसंख्यक भी हो जायेंगे

बहुसंख्यक होते ही क्या होगा वो आप कश्मीर, बांग्लादेश, और पाकिस्तान जैसे अनेकों उदाहरण से समझ सकते है, भारत में बढ़ते उन्मादियों और इनकी मदद कर रहे वामपंथी और सेकुलरों को रोका जाना भारत के अस्तित्व के लिए बहुत जरुरी है

ये एक कड़वा सच है, अगर भारत में बढ़ रहे मजहबी उन्मादियों और इनके साथ खड़े सेकुलरों को न रोका गया तो भारत बचेगा नहीं

शफीकुर रहमान समाजवादी पार्टी का सांसद है, कहने को ये पार्टी एक सेक्युलर पार्टी है, अखिलेश यादव इसके मुखिया है, उत्तर प्रदेश की एक मुस्लिम बहुल सीट संभल से ये जीतकर लोकसभा पहुँच गया है

लोकसभा में पुरे देश का अपमान करते हुए ये वन्दे मातरम को हराम बताता है, और कहता है की वन्दे मातरम नहीं बोल सकते, इस मुद्दे पर अखिलेश यादव भी इसका समर्थन करते है और इसके खिलाफ बोलने से साफ़ इंकार कर देते है

इनकी संख्या 20% है उत्तर प्रदेश में तो शफीकुर रहमान जैसा नेता कह रहा है की वन्दे मातरम हराम है, इनकी आबादी बढ़ेगी, जो की एक तथ्य है, तो कल को ये राष्ट्रगान को हराम बताएँगे, फिर परसों संविधान को हराम बताएँगे और फिर संविधान हटाकर शरिया लगाने की मांग कर देंगे

और मांग ही नहीं जैसे ही संख्या बढ़ी वैसे ही कश्मीर से हालात हर शहर की हकीकत हो जायेंगे, हर राज्य की हकीकत हो जायेंगे, और देश को सीरिया बनने से फिर रोक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा

वक्त काफी नाजुक दौर से गुजर रहा है और पुरे देश को इस बारे में सोचने की जरुरत है, अगर इन मजहबी उन्मादियों और इनके साथ खड़े सेक्युलर नेताओं को न रोका गया तो भारत का अस्तित्व सिर्फ कुछ दशको तक ही कायम रह सकेगा, और ये भूल न ही करें की ‘हस्ती मिटटी नहीं हमारी’, कभी एक ज़माने में पाकिस्तान बांग्लादेश भी 100% हिन्दू बहुल इलाका ही था